गैलेरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गैलेरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

विनय शर्मा का नया स्टूडियो

सुकून का एहसास

मूमल नेटवर्क, जयपुर। शहर के जूझारू कलाकार विनय शर्मा ने अपने जगतपुरा स्थित नये स्टूडियो काम-काज शुरू कर दिया है। पिछले दिनों विनय ने देश के प्रमुख वरिष्ठ कलाकारों को यहां आमंत्रित कर इस नई शुरूआत का साक्षी बनाया।
नामी-गिरामी कलाकार देखेने आए
इस मौके पर चित्रकार जतिन दास, प्रभाकर कोल्टे, आरबी भास्करन, दीपक शिंदे, गोपी गजवानी और मंजू नाथ कामथ सहित करीब 20 चित्रकार उपस्थित थे। स्टूडियो में कलाकारों की शुभकामनाओं के लिए दीवार पर एक विशेष खिड़की नुमा फलक तैयार किया गया था। कलाकारों ने इस कैनवास पर अपने हस्ताक्षर किए और शुभकामना संदेश भी लिखे।
स्टूडियो को दो खण्डों में विभाजित किया गया है। एक जहां विनय पेंटिेग करेंगे, यहां इनकी पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैँ। दूसरा खण्ड विनय के बेहतरीन इंस्टालेशन्स से सजा हुआ है। यह वो जगह है जहां पर किसी भी कलाप्रेमी को घंटों तक रोका जा सकता है। स्वयं आने वाले का मन यहां से बाहर नहीं निकलना चाहेगा।
बीते काल की सैर करवाने में समर्थ
पुरानी बहियों के पन्नों, स्याही की बिखरी टिकिया, पुराने दवात-कलम की महफिल और ऊपर सजे झाडफ़ानूस के साथ संगीत की  लहरियों के बीच इतिहास की आलौकिक की सैर करवा देता है। यहीं पर एक कोना करीब सौ साल पुराने एक दर्जन से भी अधिक रेडियो सेट्स से सजाया गया है जो रेडियो इतिहास को जानने-समझने के लिए उत्सुक कर देता है। एक तरफ पुराना चूड़ी बाजा कहाने वाला ग्रामोफोन और उस पर चल रहे रिकार्डस से निकलते गीत के बोल वहीं उसके आस-पास बने रहने को मजबूर कर देते हैं। पुराना हारमोनियम, सितार, पुराने घरों की खिड़की-दरवाजों और फर्नीचर से सजा यह कक्ष इतिहास की गहरी अनुभूतियों के साथ कहीं बीते काल की सैर करवाने में समर्थ हैं।
इंस्टालेशन को मिलेंगे नए आयाम 
विनय की भावनाओं से अहसास होता है कि उनका यह कला संसार आने वाले दिनों में एतिहासिक कल्पनाओ के इंस्टालेशन से नित नए इतिहास रचता रहेगा। भागती-दौड़ती-जिन्दगी को सकून देते हुए यहां देर तक ठहरने के लिए मजबूर करती यह दुनियां एक हद तक समय को कुछ देर रोके रखने का सफल प्रयास कहा जा सकता है।


गुरुवार, 27 सितंबर 2012

खुद में खोए कलाकारों का जमावड़ा, अगले महीने दिल्ली में...

  दिल्ली में अगले महीने आईफैक्स में आयोजन

मूमल नेटवर्क, नई दिल्ली। राजधानी की आईफैक्स आर्ट गैलेरी में नवम्बर माह में देश भरके अनुभवी चित्रकारों के साथ युवा कूची के तेवर भी देखने को मिलेंगे।
'पेन्ट फार जस्टिस' के नाम से होने वाले इस प्रदर्शन में मुख्यतया दो विचारों का दर्शन समेटने का प्रयास होगा। पहला ये कि कलाकार उन विषयों को अपनी कृतियों में उकेरे जिन से आम व्यक्ति मानसिक रूप से घायल हुआ है। दूसरा विचार यह है कि इस आयोजन के जरिए उन कलाकारों को मुख्य सामाजिक धारा में जोड़ा जाए जो अभी खुद में ही खोए हुए हैं।

इस आयोजन के लिए बड़े पैमाने पर व्यवसायिक व्यवस्थाएं की गई हैं, इसमें भाग लेने के लिए प्रत्येक कलाकार से 1100 रुपए शुल्क लिया गया है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए पेशेवर लोगों की सेवाएं ली गई हैं, यह बात अलग है कि देशभर में वरिष्ठ कलाकारों के विभिन्न गुटों ने इस आयोजन को दरकिनार किया है।

इस आयोजन में प्रत्येक राज्य से ग्यारह-ग्यारह कलाकारों के दल भाग लेंगे। इन कलाकारों के दल मेंं एक सीनियर आर्टिस्ट उनका कन्वीनर होगा। राजस्थान से जाने-माने चित्रकार और कला शिक्षक डा. अनुपम भटनागर के प्रतिनिधित्व में जो दल इस प्रदर्शन में भाग लेगा उसमें जयपुर से रमेश शर्मा, जोधपुर से प्रदिप्तों दास, अजमेर से रूपाली माथुर, कोटा से डा. सुरेश प्रजापति, कुचामन सिटी से गिरीश, भीलवाड़ा से अनिल मोहनपुरिया, एस.एन. सोनी, निशा कानावत व सौरव भट्ट, उदयपुर से डा. मोहनलाल जाट, व बांसवाड़ा से स्वयं डा. अनुपम भटनागर शामिल हैं।
पेंन्ट फार जस्टिस के लिए राजस्थान से डा. अनुपम भटनागर की नई कृति 'ओह! मेरा बचपन'  इसे केनवास पर एक्रेलिक रंगों से सजाया गया है। इसका आकार है 24 गुणा 30 इंच।  कृति पर कलाकार ने कविता भी लिखी है।
  कविता
ओह! मेरा बचपन
कोई है?
जो दिलाए मुक्ति;
बैग के बोझ से
और
लौटा दे मेरा बचपन
ए बी सी और वन टू थ्री ने
खो दिया जिसे...
बैग, बोतल, टिफिन का
कंधे तोड़ता बोझ
सभी ने किया बदरंग
बचपन का रंग...
नानी की कहानियां
आइस-पाइस, छुप्पा-छुप्पी
लंगड़ी-टांग, पकड़म-पकड़ाई
सब... वो-मारा वो-काटा
मेरी गुडिय़ा
उसकी शादी
खेल मेरे बचपन के
बस रस्में निभाई...
सबका गौना सबकी विदाई
फिर एक दिन दब गया
बैग तले बचपन
ओह! मेरा बचपन
झूल रहा है बैग में...
डा अनुपम भटनागर द्वारा अपनी कृति पर लिखी पहली कविता