शनिवार, 14 दिसंबर 2013

छोटे शहरों में भी महंगी पेंटिंग्स की सेल

25 हजार से शुरू होकर एक लाख रुपए तक की 11 पेंटिंग्स बिकी 
मूमल नेटवर्क, रांची।
जवाहर लाल नेहरू कला केंद्र में 42 पेंटिंग्स से सजी एग्जीबिशन लगी और उनमे से 11 पेंटिंग्स बिक गयीं। इनमें वो पेंटिंग्स शामिल थीं जिनकी कीमत 25 हजार से शुरू होकर एक लाख रुपए तक की थी।  ऐसा रांची और पूरे झारखंड में पहली बार हुआ। इस खरीददारी ने रांची के आटिँस्टों की आंखों में यह सपना सजा दिया है कि वे दिन अब दूर नहीं जब यहां भी मेट्रो सिटीज की तरह क्रिस्टी और सॉदबी की पेंटिंग्स की ऑक्शन लगेगी और खरीदनेवाला भी रांची का ही होगा।
 मिडिल क्लास फैमिली ने खरीदा
रांची के आर्टिस्ट प्रवीण कर्मकार का कहना था कि सिटी में पेंटिंग्स की अच्छी प्राइस पर सेल होना अच्छी बात है।  यह इस बात का संकेत है कि मेट्रोपॉलिटन सिटी की तरह यहां भी कला के कद्रदान पैदा हो रहे हैं। पहले रांची की मिडिल क्लास फैमिली पेंटिंग्स खरीदना अफोर्ड नहीं कर पाती थी, पर अब ऐसा नहीं है। एग्जीबिशन में मेरी दो पेंटिंग्स जिनकी कीमत 20-25 हजार रुपए के बीच है बिकी है और उसे मिडिल क्लास फैमिली के लोगों ने ही खरीदा है। ये दोनों पेंटिंग्स लैंडस्केप पेंटिंग्स थी और दोनों ही अनटाइटल्ड हैं। इनमें झारखंड की खूबसूरत सीनरी को दर्शाया गया है।
 यह बहुत बड़ा चेंज है  
झारखंड के ही एक नामी आर्टिस्ट जिनकी पेंटिंग भी एग्जीबिशन में सेल हुई है, ने बताया कि रांची के लोगों के माइंडसेट में चेंज आया है। अब लोग पेंटिंग्स को भी असेस्ट के रूप में देखने लगे हैं। आर्ट और आर्टिस्ट्स के स्टैंडर्ड के हिसाब से लोग हाई प्राइस चुकाने के लिए तैयार दिख रहे हैं। पहले लोग किसी का क्रिएशन यानी पेंटिंग्स खरीदने से बेहतर एक पोस्टर खरीदना समझते थे पर अब ऐसा नहीं रहा। यह बहुत बड़ा चेंज है।
आर्टिस्ट हरेन ठाकुर ने बताया कि कला के प्रति लोगों में दीवानगी कैसी है। इसका असर आर्ट गैलरी में लगे
एग्जीबिशन में देखने को मिल रहा था। रांची के बाबला सरकार ने तीन पेंटिंग्स बुक कराई है। वहीं मेकॉन कॉलोनी में रहनेवाली एक म्यूजिशियन फैमिली ने भी नामी आर्टिस्ट सुमन टोप्पो की पेंटिंग्स खरीदी हैं
एग्जीबिशन में विनोद रंजन, शर्मिला ठाकुर और दिनेश सिंह की भी पेंटिंग्स सेल हुई। आर्टिस्ट विनोद रंजन ने बताया कि उनकी बनाई गई पेंटिंग मॉर्डन क्रो 20 हजार रुपए में बाबला सरकार ने खरीदी। उन्होंने बताया कि रांची के लोग डेकोरेटिव पेंटिंग्स खरीदना चाहते हैं, जिसे वे बेडरूम या फिर अपने हॉल में लगा सके। 

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

तस्लीमा जमाल की पेंटिंग्स एग्जीबिशन


'गढ़ी' के रंगों में दिखा मिट्टी से जुड़ाव 
मूमल नेटवर्क, जयपुर
घर, गांव, मिट्टी से झांकता अपनत्व और पिता के सपनों को पूरा करने का अटल निश्चय, यह सब दिखा बांसवाड़ा निवासी आर्टिस्ट तस्लीमा जमाल की पेंटिंग्स एग्जीबिशन में।  जेकेके की सुकृति आर्ट गैलरी में 'गढ़ी' नाम से प्रदर्शित इस सोलो एग्जीबिशन में विभिन्न रंगों और चेहरे के अलग-अलग भावों को एक खास डिजाइन में पेश करते हुए तस्लीमा ने अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से अपने देश, गांव के माहौल, खेत- खलिहान, चौपाल, पनघट, पशु- पक्षियों , बड़े-बुजुर्ग और बच्चों को बड़े ही रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। मॉडर्न और ट्रेडिशनल आर्ट डिजाइन को एक कैनवस पर उकेरती इन पेंटिंग्स का मीडियम मुख्य रूप से ऑयल ऑन कैनवस है।
पेंटिंग को एक आर्ट और प्रोफेशन के तौर पर अपनाने वाली तस्लीमा ने बताया कि उनके पिता का यह सपना था कि बड़ी होकर तस्लीमा पेंटिंग्स और रंगों के माध्यम से अपना भविष्य संवारें। वे कहती हैं कि जब वे 12वीं कक्षा में थी, तो उनके पिता का देहावसान हो गया। पिता के चले जाने के बाद उन्होंने यह तय किया कि वे अपने पिता का सपना अवश्य पूरा करेंगी। तस्लीमा की पेंटिंग्स में गांव के रंग दिखाई देते हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण है  उनका उनके पिता, परिवार, और गांव के प्रति लगाव। 

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

कला सत्य की अनुकृति -जैसवाल


छात्राओं ने दिया प्रतिभा का परिचय 
मूमल नेटवर्क, अजमेर।
आकार ग्रुप के जाने-माने आर्टिस्ट डॉ. अमित राजवंशी के संयोजन में राजकीय कन्या महाविद्यालय की छात्राओं की दो दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी का शुभारंभ 12 दिसम्बर को किया गया। सूचना केन्द्र की कला दीर्घा में आरम्भ हुई इस प्रदर्शनी का उद्घाटन कलाविद् राम जैसवाल ने किया। इस अवसर पर समकालीन चित्रकार प्रहलाद शर्मा भी उपस्थित थे।
जैसवाल ने छात्राओं की कलाकृतियों की प्रशंसा कर उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कला सत्य की अनुकृति है। इसके माध्यम से समाज को जोड़ा जा सकता है। संयोजक राजवंशी ने बताया कि यह पहला अवसर है, जब महाविद्यालय की छात्राओं की चित्र प्रदर्शनी आम लोगों के लिए आयोजित की जा रही है। चित्रकार प्रह्लाद शर्मा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोग छात्राओं की कला प्रतिभा से रूबरू हो सकेंगे। इससे कलात्मक वातावरण भी बनेगा।
 कार्यक्रम अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. मीरा चंदावत ने कहा कि छात्राओं ने अपनी कला प्रतिभा का परिचय दिया है। इस अवसर पर उपाचार्य आरएस अग्रवाल भी मौजूद थे। प्रदर्शनी में 50 विद्यार्थियों की 300 चित्रकृतियां प्रदर्शित की गई । 

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

अनंत आकाश सी संभावनाएं

अपनी पेंटिंग दिखाते हुए जगदीश 

कुछ और निखरा जगदीश व राहुल का काम  
मूमल नेटवर्क, जयपुर। नि:शक्तजन की एक दायरे में सिमटी दुनियां में अनंत आकाश सी संभावनाएं देखते रहने वाले संवेदनशील चित्रकार जगदीश प्रसाद मीणा ने एक बार फिर अपनी कृतियों में इसी विषय पर अपनी नई अभिव्यक्तियां कैनवास पर उकेरी हैं। इस बार जगदीश की सोच और बड़ी और विचार अधिक परिपक्व नजर आ रहे हैं। इसी के साथ नए हस्ताक्षरों के साथ राहुल उषाहरा ने अपनी कूंची को प्रकृति के साथ एक-मेक किया है।
जवाहर कला केंद्र की सुकृति आर्ट गैलेरी में 7 से 11 दिसम्बर तक चली इस चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ राजस्थान विश्वविद्यालय की पूर्व डीन ओर जगदीश की कला गुरू प्रोफेसर कमला गर्ग ने किया। पिछले दिनों राजस्थान यूनिवर्सिटी के चित्रकला विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तक पहुंचे जगदीश प्रसाद मीणा और अभी अपनी कला शिक्षा में लीन भ्राता राहुल उषाहरा ने अपनी पेंटिंग्स में अपने नए तेवर दिखाएं हैं। जगदीश नें चिरपरिचित नीले रंग में नि:शक्तजन की दुनियां दर्शाते हुए यह व्यक्त किया है कि आकाश के इस रंग में अनंत अतंरिक्ष है। यही वजह है कि सभी पेंटिंग्स नीले रंग में बनाई गई हैं। मानव का दुखी जीवन संघर्ष, नि:शक्त बच्चों की मानसिक पीड़ा व गर्भावस्था में नारी की मानसिक अवस्था को विषय बनाकर अपनी बात कही है। वहीं रहुल ने प्राकृतिक दृश्यों, खेत-खलिहानों के बीच बिजूके बनाकर अपनी बात कहने के नए आयाम चुने हैं। ऑयल, एक्रेलिक, वॉटर, चारकोल, पेंसिल से बनी इन पेंटिंग्स को दर्शकों की बेहतर सराहना मिली। ग्रासरूट लेवल पर अपनी जड़े बताते हुए हरे बांस के तन पर विभिन्न नामों का लिखा जाना हो या खेत में लगाए गए बिजूके में महिला वस्त्रों का उपयोग कर नारी की भागीदारी दर्शाना, कमांबेश सभी कृतियों में युवा मन की बात रंगों की भाषा से कही गई है।
राहुल अपनी पेंटिंग  के साथ 


मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

MADE IN HEAVEN 50 फीट लंबी पेंटिंग


जियोलॉजिस्ट शुभोब्रत का कला पक्ष   
'मेड इन हैवन '
मूमल नेटवर्क, जयपुर। लिम्का बुक ऑफ  रिकाड्र्स में नाम दर्ज कराने वाले जयपुर के आर्टिस्ट शुभोब्रत मुखर्जी ने 50 फीट लंबी पेंटिंग 'मेड इन हैवन' पंटिंग का प्रदर्शन कर एक बार फिर कला जगत को चौंकाया। यह पेंटिंग ऐसी मशहूर जोडिय़ों को समर्पित की गई है, जिन्होंने अपने साथ के लिए हर तरह  की कठिनाइयों का सामना किया। यह कलाकृति ट्रेसिंग फिल्म पर एक्रेलिक कलर्स से बनाई गई है।
पिछले दिनों जेकेके की चतुर्दिक आर्ट गैलरी में हुए इस प्रदर्शन में 'मेड इन हैवन' के जरिए शुभोब्रत ने यह अभिवक्त किया है कि पृथ्वी पर एक दूसरे के प्रति प्रेम में सराबोर रहने वाली जोडियां स्वर्ग में ही तय हो जाती है। पेंटिंग में अंतरिक्ष की पृष्ठभूमि में विश्व की मशहूर जोडिय़ों के रूप में ें शिव-पार्वती से शुरू कर राम-सीता, राधा-कृष्ण, शकुंतला-दुष्यंत, एडम-ईव, सावित्री-सत्यवान, एंटोनी-कल्योपात्रा, शांतनु-सत्यवती, अर्जुन-द्रौपदी, संयुक्ता-पृथ्वीराज, सलीम-अनारकली, शाहजहां-मुमताज, हेलेन-पेरिस, लैला-मजनू और रोमियो-जूलियट तक को शामिल किया गया है। यह पेंटिंग उन सभी जोडिय़ों के नाम की गई है जिन्होंने अपने साथ के लिए हर तरह के दुख और कठिनाइयों का सामना किया।
इस पेंटिंग को बनाने में 6 महीने का समय लगा।
शुभोब्रत एक जियोलॉजिस्ट हैं और साइंस बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन भीतर छुपा कलाकार उनसे यह सब भी कराता रहता है। इससे पूर्व शुभोब्रत ने लगभग इतनी ही लम्बी पेंटिंग, 'डांस इन हैवनÓ बनाई थी। वर्ष 2010 में वह लिम्का बुक ऑफ रिकाड्र्स में दर्ज की गई। इसमें भी अंतरिक्ष की पृष्ठभूमि देश-विदेश की दो दर्जन से अधिक नृत्य शैलियों को दर्शाया गया हैं।

रविवार, 8 दिसंबर 2013

जयपुर में अखिल भारतीय महिला चित्रकार कला शिविर

महिलाओं द्वारा तैयार कृतियों का मूमल ने बनाया कोलाज 

मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केन्द्र द्वारा पिछले पखवाड़े आयोजित अखिल भारतीय महिला चित्रकार कला शिविर के दौरान समसामयिक महिला चित्रकारों ने अपनी परिचित शैली में कैनवास पर अपने भाव अभिव्यक्त किए।
चार दिसम्बर की शाम केन्द्र की पारिजात द्वितीय कला दीर्घा में पांच दिवसीय इस शिविर में दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, झारखण्ड  एवं राजस्थान की 20 चित्रकारों ने भाग लिया । शिविर का उद्घाटन कला एवं संस्कृति विभाग की प्रमुख शासन सचिव  किरण सोनी गुप्ता ने किया। पांच दिवसीय इस शिविर में दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, झारखण्ड  एवं राजस्थान की प्रमुख चित्रकारों ने भाग लिया।
इस शिविर में कलाविद् से सम्मानित जयपुर की वरिष्ठकलाकार वीरबाला भावसार अपने पसंदीदा विषय ग्रामीण परिवेश को सेंड के माध्यम से अभिव्यक्त किया। जानी-मानी चित्रकार ममता रोकना ने अपने महिला सशक्तिकरण के साथ उनके सौन्दर्य को अपना विषय बनाया जबकि मणी भारतीय ने अपनी कृति में कैनवास पर कपड़े  से कोलाज बनाया। मीनाक्षी भारती के पंचतत्वो से सजी पेंटिंग लुभा रही थी। किरण सोनी गुप्ता ने भी शिविर में अपने प्राकृतिक भावों को कैनवास पर अभिव्यक्त किया। उदयपुर की मीना बया ने अपने चिरपरिचित अंदाज में एक नई अनुभूति को कैनवास पर आकार दिया।

शिविर में सम्मिलित होने वाली कलाकारों में झारखण्ड-मुक्तागुप्ता (जमशेदपुर), उत्तरप्रदेश-नीतू सिंहल (लखनऊ), पंजाब-कविता सिंह (पटियाला), मध्यप्रदेश-अपर्णा अनिल, शैलिका श्रीवास्तव (भोपाल), दिल्ली-राखी जैन, पूनम चन्द्रिका त्यागी, शुभ्रा चांद, इन्दू त्रिपाठी, राजस्थान-दीपिका हाजरा (अजमेर), सुरजीत कौर चौयल (उदयपुर), मीनाक्षी भारती (बूंदी), मीना बया (उदयपुर), वीरबाला भावसार (जयपुर), मणी भारतीय (बूंदी), कृष्णा महावर (कोटा), ममता रोकना (जयपुर), कुक्कु माथुर (जयपुर), शबनम हुसैन (उदयपुर), एवं अर्चना (किशनगढ़) प्रमुख हैं।

बुधवार, 4 दिसंबर 2013

चार राज्यों के युवा चितेरों की उड़ान



हरियाणा, उड़ीसा, हिमाचलप्रदेश और राजस्थान के कलाकारों की अभिव्यक्ति 
मूमल नेटवर्क, जयपुर। जवाहर कला केंद्र की सुदर्शन आर्ट गैलरी में 3 से 6 दिसम्बर तक हरियाणा, उड़ीसा, हिमाचलप्रदेश और राजस्थान के कलाकारों की अभिव्यक्ति मुखर हुई।
युवा रंग और अभिव्यक्ति के चलते अजमेर के विक्रम सिंह मारोठिया, धर्मशाला के संतोष मौर्य, उड़ीसा के गिरधारी साहू और शिमला की नेहा शर्मा द्वारा बनाई पेंटिंग्स ने दर्शकों को प्रभावित किया। कमोबेश सभी कृतियों में कलाकारों की नई सोच और रचना के नए अंदाज कई अर्थों में भिन्न रहे। प्रदर्शनी का उद्धाटन पद्मश्री से सम्मानित चित्रकार एस. शाकिर अली और वरिष्ठ मिनिएचर आर्टिस्ट जयशंकर शर्मा ने किया।
लकड़ी के फंटों पर म्यूरल 
 विक्रम सिंह मारोठिया ने लकड़ी के फंटों पर म्यूरल का अहसास कराती कलाकृतियां बनाई। कुछ नया करने के उत्साह में उन्होंने इस नए माध्यम में म्यूरल जैसी रचना की है। इसमें पेपरमैशी से तैयार मुखौटों, सूखी डालियों और पत्तियों के साथ गोलाकारों के उपयोग से उपजाए थ्री डी इफेक्ट ने कृतियों को बेहतर किया है। कलाकार ने प्रकृति और इंसान के रिश्तों को दर्शाने में एक हद तक सफलता भी पाई है।

ईश दर्शन के चटक अंदाज
हिमालय के करीब हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से आए संतोष मौर्य ने कैनवास पर ईश्वर दर्शन को नए अंदाज से जीवंत किया। संतोष ने शिव - पार्वती और शिवलिंग की आकृतियों के साथ ही गणेश को विभिन्न आयामों में जीवंत किया है। चटख रंगों से नटराज की मुद्रा में काली माई की आकृति चित्रित करने का उनका अंदाज भी ताजगी से भरा था।
कैनवास पर मेडिटेशन
नेहा शर्मा ने कैनवास पर मेडिटेशन को चित्रित किया है। मेडिटेशन से जीवन में खुशियों के फूल खिलाने की सोच के साथ रंगों के आकर्षक संयोजन से नेहा की पेंटिंग्स अधिक आकर्षक बनी हैं।
 टैक्सचर की गहनता
भारती शर्मा ने तरह-तरह की ज्योमेट्रिकल आकृतियां बनाकर पानी की उथल-पुथल से बनने वाले टैक्सचर को अपने कलाकृतियों का माध्यम बनाया। रचनाएं अमूर्त है, जिसमें टैक्सचर की गहनता देखने लायक हैं।