रविवार, 19 अक्टूबर 2014

क्रिस्टीज की भारत में दूसरी नीलामी दिसंबर में


क्रिस्टीज की भारत में दूसरी नीलामी दिसंबर में
मूमल नेटवर्क, मुंबई।
लंदन स्थित नीलामी घर क्रिस्टीज 11 दिसंबर को मुंबई में अपनी दूसरी नीलामी का आयोजन करने जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि पिछले साल की तुलना में इस बार कला संग्राहकों द्वारा कला बाजार में अधिक पूंजी निवेश किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 2013 में मुंबई में क्रिस्टीज की पहली नीलामी में भारतीय कला बाजार के मूल्यों की स्थापना के लिहाज से अभूतपूर्व सफलता हासिल की थी। क्रिस्टी की पहली नीलामी में भारत में पहली बार अत्यधिक मूल्य में कला की बिक्री हुई थी। तब 6 करोड़, 59 लाख, 37 हजार, 500 रुपए की कुल बिक्री हुई थी, जो पूर्वानुमान से दुगनी थी।
पिछले दिनों भारत में हुई कला के खरीद फरोख्त से यह साबित हो चुका है कि अच्छी कलाकृतियां कला संग्राहकों को अधिक कीमत के बाद भी आकर्षित करती हैं।  उदाहरण के लिए, पिछले महीने दिल्ली स्थित सैफ्रान आर्ट द्वारा एक नीलामी में कुल 83 कलाकृतियां 38 करोड़ में बेची गई। इस विक्रय में जहांगीर सबावाला की एक पेंटिंग की कीमत 3 करोड़ रुपए प्राप्त हुई थी।
पिछले महीने ही आधुनिक और समकालीन कला की एक ऑनलाइन नीलामी में एम.एफ. हुसैन, एस.एच. रजा और अंजलि इला मेनन सहित भारतीय कलाकारों की कृतियों से 20 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। आस्तागुरू डॉट कॉम द्वारा हुई इस नीलामी में
रजा कीे 'भूमि' शीर्षक वाली एक पेंटिंग का मूल्य 3 करोड़ रुपए मिला था।
भारत में भारतीय कला की सफल बिक्री को देखते हुए क्रिस्टीज की एशियन आर्टस के अंतरराष्ट्रीय निदेशक  अमीन जाफर इस साल दिसम्बर में होने वाली नीलामी से अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। इस नीलामी के लिए अच्छी कलाकृतियों का चयन किया गया है।
अमीन जाफर ने जानकारी देते हुए कहा कि वह नीलामी में जंहागीर सबावाला द्वारा 1974 में बनाए गए एक लैण्डस्केप 'ग्रीन केप' के साथ तैयब मेहता का दुर्लभ पोटे्रट नीलाम किया जाएगा। इनकी नीलामी से 1.2 करोड़ से 1.8 करोड़ रुपए मिलने का पूर्वानुमान लगाया गया है। इसके साथ ही   भूपेन खखर, सुबोध गुप्ता, राशिद राणा, मिठु सेन, भारती खेर, नीलिमा शेख और ठुकराल व टागरा के काम शामिल हैं।
पिछले साल कला बाजार की अच्छी प्रतिक्रिया देखकर क्रिस्टी ने भारत में एक वार्षिक नीलामी करवाने का फैसला किया है। जाफर कहते हैं, 'हम लंबे समय के लिए भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम 20 साल के लिए भारत में उपस्थिति बनाए हुए हैं, लेकिन अब वह वक्त आया है जो भारत में कला बाजार के लिए एक जीवंत और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करेगा।
क्रिस्टी की दूसरी नीलामी के लिए हर कोई इंतज़ार कर रहा है क्योंकि यह सही मायने में भारतीय कला के लिए बाजार को परिभाषित करेगा। पहली नीलामी में कलाकृतियों का एक शानदार संग्रह था और क्रिस्टी इसके पीछे की पूरी ताकत थी। अब दूसरी नीलामी में गुणवत्ता और मूल्य के लिहाज से कुछ नए आयाम सामने आएंगे, यही आशा है।

Sukant Das's RADHIKA at ICA Gallery


गुरुवार, 11 सितंबर 2014

और संवरेंगी Rajasthan CMO की कलाकृतियां

मूमल नेटवर्क, जयपुर।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने कार्यालय में सजी कलाकृतियों के रखरखाव पर ध्यान देते हुए उनके फै्रम बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मुख्यमंत्री कार्यालय के विभिन्न तलों पर प्रदर्शित प्रदेश के प्रमुख चित्रकारों की कृतियों सहित विभिन्न स्कूली बच्चों की चित्रकारी को भी संजोया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के विभिन्न कक्षों और गलियारों को सजाने के लिए अपने पिछले कार्यकाल में राजे ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के सहयोग से राजकीय संग्रहालयों, राजस्थान ललित कला अकादमी और जवाहर कला केंद्र से कलाकृतियां एकत्र कराई थी। अभी सीएमओं में कोटा, झालावाड़, भरतपुर और के राजकीय संग्रहालयों से जुटाई गई पाषाण प्रतिमाओं सहित पारंपरिक और समामयिक चित्रकला की कृतियां सजाई गई हैं। स्कूली बच्चों की नजर में राजस्थान क्या और कैसा है, इसे नजर में रखते हुए आयोजित कार्यक्रमों से निकली बाल कृतियों को भी सीएमओ में प्रमुखता से सजाया गया है।

सीएमओंं में प्रदेश के 59 कलाकारों की कुल 83 कलाकृतियां शामिल हैं। इनमेंं सबसे अधिक पंटिंग्स उदयपुर के चित्रकार ललित शर्मा की हैं। इसके बाद राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा की चार कलाकृतियां हैं। दिलीप सिंह चौहान, विद्यासागर उपाध्याय व मीनाक्षी भारती कासलीवाल की तीन-तीन और बी.सी. गुई, देवकी नंदन शर्मा, जी.एल. जोशी, गोपाल शर्मा, हरिशंकर गुप्ता, लालचंद मारोठिया, एम. के. शर्मा 'सुमहेंद्रÓ, पी. अंजनी रैड्डी, आर.बी. गौतम, सुरेश राजोरिया और सुरेश जोशी की दो-दो पेंटिंग्स शामिल की गई हैं। 

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

डा. अन्नपूर्णा ललित कला-संगीत विकास परिषद की प्रान्तीय अध्यक्ष

मूमल नेटवर्क, जयपुर। वरिष्ठ चित्रकार डा. अन्नपूर्णा शुक्ला को गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) की संस्था ललित कला-संगीत विकास परिषद ने राजस्थान का प्रान्तीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम बहादुर द्विवेदी ने उनकी नियुक्ति के साथ यह आशा व्यक्त की है कि इस नियुक्ति के बाद डा. शुक्ला के प्रयासों से परिषद राजस्थान का आईना बनेगी।

सोमवार, 25 अगस्त 2014

जूही जैन की कृतियों का प्रदर्शन 29 से जयपुर में


मूमल नेटवर्क, जयपुर। कलाकार जूही जैन की कृतियों की एकल कला प्रदर्शनी जवाहर कला केंद्र की सुदर्शन कला दीर्घा में 29 से 31 अगस्त तक होगी। वरिष्ठ चित्रकार प्रो भवानी शंकर शर्मा इसका उद्धाटन करेंगे। इस प्रदर्शनी में जूही ने अमेरिकी कवि और उपन्यासकार बुकोवस्की की रचनाओं को कैनवास पर आकार देने का प्रयास किया है। 'बुकोवस्की क्रॉनिकल' के नाम से आयोजित इस शो में प्रदर्शित जूही के चित्र शब्दों में व्यक्त गुस्से और खुशी की अभिव्यक्ति करते हैं।
स्वयं अपने प्रयासों से चित्रकला में दक्षता की ओर बढ़ती जूही जैन जयपुर में काम करती हैं। हालांकि उनका काम दिल्ली में पला-बढ़ा है, लेकिन उनका लगाव जयपुर से ज्यादा है। उल्लेखनीय है जूही टेटू आर्ट के क्षेत्र में अधिक जानी जाती हैं।

रविवार, 24 अगस्त 2014

थ्रू दी हार्ट में बंगाली कलाकारों का बोलबाला


मूमल नेटवर्क, जयपुर। देशभर के करीब 40 चित्रकारों ने दिल से कही जाने वाली भाषा को कैनवास पर आकार दिया और उन्हें पिछले दिनों गुलाबी नगरी जयपुर में 'थ्रू दी हार्ट' के नाम से प्रदर्शित किया। इनमें राजधानी दिल्ली सहित पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ व झारखंड के कलाकार शामिल है। पड़ौसी देश नेपाल और बांग्लादेश के एक-एक कलाकारों की भागीदारी के चलते इसे इंटरनेशनल आर्ट शो शो किया गया।
प्रदर्शनी का उद्धाटन वरिष्ट कलाकार डा. चिन्मय मेहता ने किया। इस आर्ट शो में पश्चिम बंगाल के 19 कलाकारों सहित अन्य क्षेत्रों से शामिल 5 अन्य बांग्लाभाषी कलाकारों के कारण बंगाली कलाकारों के काम का बोलबाला रहा।
नई दिल्ली के राजिब सिकदार ने जीवन की उपलब्धियों को मिक्स मीडिया के जरिए दर्शाया है। पश्चिम बंगाल के नादिया में जन्में सिकदार फ्रिलांस आटिस्ट हैं। आईफेक्स से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित राजिब ने बताया कि इस प्रदर्शनी के प्रमुख के रूप में वे जयपुर में उपस्थित हैं। देशभर से इस शो में शामिल चित्रकारों के यह काम इससे पहले भी कई शहरों में प्रदर्शित किए जा चुके हैं। अब जयपुर के बाद अगला शो बंगलूर में आयोजित होगा।

कोलकाता की एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट से सम्मानित राजर्षि अधिकारी ने सिल्क पर जलरंगों से पौराणिक देवी-देवताओं के साथ प्रकृति चित्रण किया है। 'वाटर गार्डन' शीर्षक के साथ एक जल कुंड की प्रकृति को बेहतर रूप से दर्शाया है। देवी दुर्गा और दुर्गा परिवार का जल विहार भी बेहतर बन पड़े हैं। गोपियों के वस्त्रों के साथ वृक्ष की शाखा पर बांसुरी वादन करते कृष्ण का चित्रण भी मन मोहक है।
कोलकाता के शुभेन्दु विश्वास ने मिक्स मीडिया में कैनवास पर जीवन के आरंभ को प्रदर्शित किया है। उन्होंने मां के गर्भ से ही एक बालक की उड़ान के प्रति रुचि को बखूबी संयोजित किया है।
छत्तीसगढ़ के पूणेन्दु मंडल ने कैनवास पर एक्रेलिक रंगों से कोलकाता के आधुनिक शहरी जीवन की हलचल में आज भी सांस लेती पुरानी ट्रामों के इन्क्लूजन को कुशलता से उभारा है।
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित झाडखंड से आई विनीता बंद्योपाध्याय के स्वभाव में कल विरासत को संभालने के साथ आज को सहेजने की झलक दिखती है। यही सबकुछ उनकी चित्रकारी में भी साफ झलकता है। उडि़सा की पारम्परिक वॉल पेंटिग्स की आकृतियों के साथ आधुनिक परिवेश व मुखौटों से वे अपनी बात कहती लगती हैं।
कोलकाता की रिनी चन्द्रा के चित्रों में मानव जीवन काल में बनते-बदलते रिश्ते और अहसास के मौसम नजर आए। उनकी कृति 'ऑटम' में शरद के पतझड़ से दरकते संबंधों का बेहतर चित्रण हैं। बहुत सरल रंगों, रेखाओं और आकृतियों से अपनी बात कहने की क्षमताओं वाले रिनी के चित्रों की सादगी आकृर्षित करती है।
पश्चिम बंगाल के गौतम शाहा मानव मन में होने वाली हलचल और सोच को आधुनिक जामे के साथ कैनवास पर साकार किया है। बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो को गहरे गॉगल्स, इयर फोन और मेडिकल माक्स से दर्शाने की सोच इनके काम में शामिल है। पुरातन वीणा के तारों की झंकार का डिजिटल साउंड की वायरिंग की रिकॉडिंग से उपजी स्थिति की एक सुधि दर्शक ने प्रवीण और कुशल जैसे शब्दों की निरुक्ति से व्याख्या कर एक बार फिर यह साबित किया कि दर्शक की सोच कलाकार की सोच से कहीं अधिक आगे हो सकती है।
इन्हीं के साथ कोलकाता के राहुल मुखर्जी ने अपनी कृति में मरणोपरान्त आत्मिक सोच को आकार देने का प्रयास किया है। जबकि चौबीस परगरना की पॉलोमी सेन ने दुर्गा रूपा स्त्री शक्ति को मछली पकडऩे के कांटों में उलझ कर पहचान खोती जा रही बेबस आकृति के रूप में दिखाया है। नजमा अख्तर व डॉ. बुशरा नसीम का काम भी सराहनीय था।
कारोबार
इन दिनों राजस्थान मेंं बंगाली चित्रकारों की सोच और तकनीक की ओर दर्शकों और बायर्स का खास ध्यान है। इक्कीस से पच्चीस अगस्त तक प्लान किए गए इस पांच दिन के आर्ट शो के दो महत्वपूर्ण दिन प्रभावित हो गए। 22 अगस्त को वकीलों के आह्वान पर जयपुर बंद और 23 अगस्त को छात्रसंंध चुनाव के लिए मतदान के कारण जेएलएन रोड बंद रहा इससे शो में दर्शकों की कमी हो गई। शेष दिनों में आए बायर्स में कोई स्थापित खरीददार नजर नहीं आया। कला बाजार में कारोबार करने की योजना के साथ निकट भविष्य में खुलकर प्रकट होने वाली एक कला दीर्घा की ओर से कुछ खरीददारी के प्रयास जरूर हुए, लेकिन कीमत बहुत कम लगाने के कारण तत्काल कोई बात नहीं बन सकी।
उल्लेखनीय है जयपुर के कला बाजार में पूरी तैयारी के साथ उतरने का जतन कर रही कला दीर्घाओं का ध्यान यहां की सबसे अधिक कारोबार करने वाली उस आर्ट गैलेरी के कारोबार के तरीके पर रहता है जो बंगाल के कलाकारों के काम पर अधिक ध्यान देती है। पिछले दिनों जेकेके में 'ह्यूस ऑफ इंडिया' के नाम से आयोजित शो में भी लगभग 10 बंगाली कलाकारों का काम प्रदर्शित हुआ था और यहां 'ग्रेस ऑफ ऑकेशन' इसी आर्ट गैलेरी की संचालिका थी।
इसके साथ ही थ्रू दी हार्ट आर्ट शो पर जयपुर के कुछ निजी कला संग्रहकों की भी निगाहें जमी थी। इन बायर्स ने स्थापित कलाकारों के बजाय न्यू ब्रश पर पैसा लगाने में अधिक दिलचस्पी दिखाई। उनका मानना है कि स्थापित कलाकारों पर मोटी रकम लगाने और उनके रेट कम हो जाने का जोखिम उठाने से बेहतर है नए कलाकारों पर कम पैसा लगा कर उनके स्थपित होने और काम की कीमत बढऩे का चांस लिया जाए।


शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

जेकेके में भारत के रंगों का उत्सव


जयपुर के जेकेके में भारत के रंगों का उत्सव
मूमल नेटवर्क, जयपुर। स्वतंत्रता दिवस पर जयपुर के जवाहर कला केंद्र की कला दीर्घाओं में दो प्रदशर्नियों का शुभारंभ हुआ इनमें एक कोलकाता के चित्रकार संजय मजूमदार और एक अन्य दिल्ली की कलाकार रजनी किरण झा के संयोजन में प्रदर्शित की गई है।
भारत के इन्द्रधनुषी रंग
ह्यूस ऑफ इंडिया के नाम से किए गए आयोजन में देश के विभिन्न भागों के 33 चित्रकारों की कलाकृतियों को दो दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है। इनमें जयपुर के डा. ललित भारतीय और डा. मणि भारतीय के काम शामिल हैं। इस प्रदर्शनी में डा. मणि भारतीय के पल-पल परिपक्व होते जा रहे कोलॉज के साथ डा. ललित भारतीय के कैनवास पर रंगों का नया संयोजन देखने का अवसर है। संजय मजूमदार ने भारतीय पौराणिक मिथकों के जरिए आज की बात कहने का प्रयास किया है तो राजिब देयासी ने ज्यामितिक आकारों से। राखी बैद ने शंख और मयुर पंख के साथ मंदिर की धंटियों और उसी के समकक्ष घुंघरुओं और देव उपस्थिति से अपनी बात कही है। उनीस खान की पेंसिल और स्वाति चटर्जी की सरल रेखाओं से चित्र प्रदर्शनी में कुछ अलग हट कर होने वाले अहसास भी थे।

रंगोत्सव
जवाहर काला केंद्र की सुदर्शन कला दीर्घा में रंगोत्सव के नाम से आयोजित प्रदर्शनी में कुल 15 चित्रकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
सभी कलाकारों की कृतियों में जीवन के विभिन्न रंगों को अपने-अपने भाव से कैनवास पर आकार दिया गया हैै। दीर्घा में तीन मूर्ति शिल्प भी सजाए गए हैं इनमें युवा मूर्तिकार विवेक कुमार द्वारा फाइवर ग्लास से रचित बड़े कानों वाले चींखते हुए व्यक्ति की कृति ध्यान आकर्षित करती है।
 डा. अर्चना श्रीवास्तव द्वारा विभिन्न पर्व व त्यौहारों के अवसर पर बनाए जाने वाले मांडने और सांझियों को कागज पर जलरंगों से उकेरा गया है। डा. रजनी ने स्वयं कैनवास पर एक्रेलिक से जल, जलज, महिला और मछली के संयोजन को बिहार की मधुबनी कला के इर्दगिर्द बुनकर नया संसार रचा है।